Arya Samaj Haridwar – Dedicated to Vedic Culture & Arya Samaj Activites Worldwide

  • सब सत्य विद्या और जो पदार्थ विद्या से जाने जाते है, उन सब का आदि मूल परमेश्वर है।
  • ईश्वर सच्चिदानंदस्वरूप, निराकार, सर्वशक्तिमान, न्यायकारी, दयालु, अजन्मा, अनंत, निर्विकार, अनादि, अनुपम, सर्वाधार, सर्वेश्वर, सर्व्यापक, सर्वान्तर्यामी, अजर, अमर, अभय, नित्य, पवित्र और सरष्टिकर्ता है उसी की उपासना करने योग्य है।
  • वेद सब सत्यविद्याओं का पुस्तक है।  वेद का पढ़ना – पढ़ाना और सुनना -सुनाना आर्यों  का परम धर्म है।
  • सत्य के ग्रहण करने और असत्य के छोड़ने में सदा उद्दत रहना चाहिए।
  • सब काम धर्मानुसार अर्थात सत्य और असत्य को विचार करके करने चाहिए।
  • संसार का उपकार करना इस समाज का मुखजीअ उद्देश्य है अर्थात शारीरिक, आत्मिक और सामाजिक उन्नति करना।
  • सबसे प्रीतिपूर्वक, धर्मानुसार यथायोग्य वर्तना चाहिए।
  • अविद्या का नाश व् विद्या की वृद्धि करना चाहिए।
  • प्रत्येक को अपनी ही उन्नति से संतुष्ट न रहना चाहिए, किन्तु सबकी उन्नति में अपनी उन्नति समझनी चाहिए।
  • सब मनुष्यों को सामाजिक सर्वहितकारी नियम पलने में परतंत्र रहना चाहिए और प्रत्येक हितकारी नियम में सब स्वतंत्र रहे।
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