Arya Samaj Haridwar – Dedicated to Vedic Culture & Arya Samaj Activites Worldwide

संसार का उपकार करना इस समाज का मुख्या उद्देश्य है अर्थात शारीरिक, आत्मिक एवंम समाज की उन्नति करना।

इस कार्य हेतु आर्य समाज हरिद्वार के निम्न उद्देश्य निश्चित किये गए है

  • वैदिक धर्म के प्रचार को बढ़ावा देना।
  • समाज का बालको एवंम नवयवको का चरित्र निर्माण करवा कर सच्चा मानव बनने में मदद करना।
  • निराश्रितों, पीड़ितों की रक्षा, सेवा और सहायता के लिए अनाथ बालक, बालिकाओं के पालन, पोषण, रक्षा तथा शिक्षा दीक्षा की निशुल्क व्यवस्था करना और आश्रमों की स्थापना अपने साधनो के अनुरूप करना।
  • वृद्धों का जीवन इस समय अत्यंत कष्टमय हो चला है उनके लिए वृद्धाश्रमों की स्थापना एवंम व्यवस्था करना।
  • देवीय आपदा तथा बाढ़, भूचाल, तूफ़ान, भूस्खलन, आदि किए कारण कही भी मानवता पीड़ित हो तो धर्म और जाती का भेद भाव किये बिना उनकी सहायता और सेवा करना।
  • निशुल्क और नाम मात्र के शुल्क वाले औषधालय चलवाना।
  • भविष्य में आर्य समाज के मंदिरों एवंम अन्य स्थानों पर स्कूल एवंम पाठशालाये खोलना।
  • छुआ -छूत के विरूद्ध जनमत जाग्रत करना।
  • नशा के विरुद्ध अभियान चला कर लोगों को नशा मुक्त होने लिए प्रेरित करना।
  • वैदिक धर्म के प्रचार -प्रसार के लिए नए नए प्रचारक, पुरोहित एवंम कार्यकर्ता तैयार करना।
  • वैदिक धर्म के प्रचार -प्रसार के लिए सभी नवीनतम एवंम प्राचीन साधनो का उपयोग करना जिनमे पुस्तकों का प्रकाशन वितरण भी शामिल है।
  • आर्य समाज के नवीन सदस्यों को बनाना।
  • गावों और पंचायतों एवंम घर घर जाकर यज्ञ करना और करना तदुपरांत वैदिक साहित्य का विवरण करना।
  • वैदिक पर्वो का प्रचार -प्रसार करना और उस अवसर पर कार्यक्रम आयोजित करना जिसमे समाज के सभी लोग सम्मिलित हो सके।
  • प्राकर्तिक आपदा से ग्रसित लोगों को हर तरीके से मदद करना।
  • वृद्ध लोगों के स्वस्थ्य, खाने-पीने व् अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करना।
  • वैदिक पर्वो को धूम-धाम से मनाना।
  • समाज से ज्यादा से ज्यादा लोगों को स्वेच्छा से जोड़ना।
  • आर्य समाज का मुख्य उद्देश्य समाज में व्याप्त पाखंड को दूर कर वेदानुसार चरित्र निर्माण करना।
  • अनाथ व् निर्धन बच्चों की शिक्षा हेतु अच्छी शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने हेतु आर्थिक व् अन्य व्यवस्था करना।
  • समाज की विधवा, परित्यक्ता व् निर्धन महिला को आत्म निर्भर बनाने हेतु, आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना।
  • वैदिक कर्मकांड के लिए योग्य पुरोहित की व्यवस्था करना।
  • जगह-जगह जाकर निर्धन व् अल्पशिक्षित समाज में यज्ञ कराना व् वेदोपदेश करना।
  • समाज के लिए निर्धन लोगों के स्वस्थ्य हेतु निशुल्क चिकित्सा सुविधा प्रदान करना।
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